🌐
हिंदी संस्करण सक्रिय है — सरल व बोलचाल की भाषा में पढ़ें
टैक्स व ITR⏱ 7 मिनट का समय🇮🇳 हिंदी सक्रिय

ऑनलाइन ITR कैसे फाइल करें (2026): सैलरीड कर्मचारियों के लिए स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

itr filingincome tax returnform 16aistiscleartaxitr 1itr 2tax refund india
ऑनलाइन ITR कैसे फाइल करें (2026): सैलरीड कर्मचारियों के लिए स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

ऑनलाइन ITR कैसे फाइल करें (2026): सैलरीड कर्मचारियों के लिए स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

अंतिम तिथि (Deadline): 31 जुलाई (वित्तीय वर्ष के लिए रिटर्न फाइलिंग)

भारत में नौकरीपेशा (Salaried) कर्मचारियों के लिए खुद अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना अब बेहद आसान हो चुका है। यदि आपकी केवल सैलरी इनकम है, कोई जटिल शेयर ट्रेडिंग या बड़ा विदेशी निवेश नहीं है, तो आप इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के नए ई-फाइलिंग पोर्टल पर मात्र 15 से 20 मिनट में अपना ITR-1 सफलतापूर्वक भर सकते हैं।

💡

गलती करने पर भारी जुर्माना: 31 जुलाई की डेडलाइन मिस करने पर ₹1,000 से लेकर ₹5,000 तक की लेट फीस (Penalty u/s 234F) लगती है, और रिफंड पर मिलने वाला ब्याज भी रुक जाता है। समय पर सही तरीके से फाइल करने से आपके बैंक खाते में रुका हुआ टीडीएस रिफंड (TDS Refund) चंद हफ्तों में आ जाता है।

आइए जानते हैं कि बिना किसी सीए (CA) की फीस दिए आप खुद अपने मोबाइल या लैपटॉप से ITR कैसे फाइल करें।


📑 आपको कौन सा ITR फॉर्म भरना चाहिए?

आपकी आय का प्रकार (Income Profile) लागू होने वाला ITR फॉर्म
सैलरीड, ₹50 लाख से कम आय, 1 घर की संपत्ति, कोई कैपिटल गेन्स नहीं ITR-1 (Sahaj) — सबसे आसान
सैलरीड + शेयर बाजार/म्यूचुअल फंड से कैपिटल गेन या ₹50L से अधिक आय ITR-2
बिजनेस, फ्रीलांसिंग, प्रोफेशनल कंसल्टिंग या इंट्राडे/F&O ट्रेडिंग ITR-3 या ITR-4 (Sugam)

नोट: 90% से ज्यादा वेतनभोगी कर्मचारियों को ITR-1 भरना होता है। यह गाइड ITR-1 पर केंद्रित है।


📋 फाइलिंग शुरू करने से पहले जरूरी दस्तावेज (Checklist)

इन 5 अनिवार्य दस्तावेजों को अपने पास रखें:

  • Form 16: अपनी कंपनी / HR से प्राप्त करें (आमतौर पर 15 जून तक मिलता है)।
  • पैन कार्ड और आधार कार्ड: दोनों आपस में लिंक होने चाहिए।
  • आधार से लिंक एक्टिव मोबाइल नंबर: ई-वेरिफिकेशन ओटीपी के लिए अनिवार्य।
  • बैंक अकाउंट डिटेल्स (खाता संख्या और IFSC): रिफंड सीधे इसी खाते में आएगा।
  • AIS और TIS स्टेटमेंट: इनकम टैक्स पोर्टल से डाउनलोड किया हुआ वार्षिक विवरण।

🔍 स्टेप 1: AIS (Annual Information Statement) चेक करें (सबसे महत्वपूर्ण)

📬

Enjoyed this post?

Get our weekly digest delivered free.

इनकम टैक्स पोर्टल पर लॉग इन करके सबसे पहले AIS चेक करें। इसमें इनकम टैक्स विभाग के पास आपकी हर एक वित्तीय गतिविधि का कच्चा-चिट्ठा होता है:

  • कंपनी से मिली कुल सैलरी और कटा हुआ TDS
  • सभी सेविंग्स बैंक अकाउंट्स और FD से मिला कुल ब्याज
  • म्यूचुअल फंड्स और स्टॉक्स की खरीद-बिक्री
  • डिविडेंड से हुई कमाई

⚠️

नोटिस से बचने का नियम: अगर आपकी कंपनी के Form 16 में ₹10 लाख सैलरी है, लेकिन आपके बैंक अकाउंट्स से ₹40,000 का FD ब्याज आया है जिसे आपने ITR में नहीं दिखाया — तो सिस्टम तुरंत ऑटोमेटेड मिसमैच का नोटिस भेज देता है। इसलिए AIS में दर्ज ब्याज की रकम को ITR में 'Income from Other Sources' में जरूर जोड़ें।


💻 स्टेप 2: आधिकारिक पोर्टल पर लॉग इन करें

  1. आधिकारिक वेबसाइट खोलें: incometax.gov.in
  2. Login पर क्लिक करें।
  3. अपना PAN नंबर यूजर आईडी के रूप में दर्ज करें और पासवर्ड डालें।
  4. यदि पहली बार उपयोग कर रहे हैं, तो 'Register' पर जाकर पैन व आधार से नया अकाउंट बनाएं।

📝 स्टेप 3: ITR फाइलिंग शुरू करें

  1. डैशबोर्ड पर e-File → Income Tax Returns → File Income Tax Return चुनें।
  2. Assessment Year (कर निर्धारण वर्ष): सही वर्ष चुनें (जैसे FY 2025-26 की कमाई के लिए AY 2026-27)।
  3. Mode of Filing: 'Online (Recommended)' चुनें।
  4. Status: 'Individual' चुनें।
  5. ITR Form: 'ITR-1' चुनें और 'Proceed with ITR-1' पर क्लिक करें।

💼 स्टेप 4: आय का विवरण (Income Details) सत्यापित करें

पोर्टल आपके Form 16 और AIS से अधिकांश डेटा अपने आप (Pre-fill) भर देता है:

1. Gross Salary (सकल वेतन)

  • अपने Form 16 के Part B से वेतन का मिलान करें।
  • स्टैंडर्ड डिडक्शन: ₹75,000 की छूट अपने आप माइनस हो जाती है।

2. House Property (घर की संपत्ति)

  • यदि आप किराए के मकान में रहते हैं तो इसे खाली छोड़ें।
  • यदि आपने होम लोन लिया है और खुद के घर में रहते हैं, तो ब्याज (Section 24b) के तहत ₹2 लाख तक की छूट क्लेम कर सकते हैं (केवल पुरानी व्यवस्था में)।

3. Income from Other Sources (अन्य स्रोतों से आय)

  • बैंक बचत खाते (Savings Interest) और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD Interest) से मिला कुल ब्याज जोड़ें।
  • कंपनियों से मिला डिविडेंड दर्ज करें।

🛡️ स्टेप 5: टैक्स डिडक्शन भरें (Old Regime के लिए)

यदि आपने New Tax Regime चुना है, तो आपको कोई डिडक्शन नहीं भरना है (स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹75,000 पहले ही मिल चुका है)।

यदि आपने Old Tax Regime चुना है:

  • धारा 80C (अधिकतम ₹1,50,000): EPF + PPF + ELSS + LIC + बच्चों की ट्यूशन फीस + होम लोन प्रिंसिपल।
  • धारा 80D (हेल्थ इंश्योरेंस): खुद व परिवार के लिए ₹25,000 तक, वरिष्ठ नागरिक माता-पिता के लिए ₹50,000 तक।
  • धारा 80CCD(1B) (NPS): ₹50,000 की अतिरिक्त अलग छूट।
  • HRA छूट: वास्तविक दिया गया किराया और HRA की छूट।

🧮 स्टेप 6: टैक्स गणना और रिफंड की जांच (Tax Preview)

सभी विवरण भरने के बाद पोर्टल आपको अंतिम समरी दिखाता है:

  • Total Tax Liability: आपके स्लैब के अनुसार कुल देय टैक्स।
  • TDS Already Paid: कंपनी और बैंक द्वारा पहले ही काटा गया टैक्स।
  • अंतिम परिणाम:
    • यदि TDS ज्यादा कट गया था: हरा बॉक्स दिखेगा — "You are eligible for a Refund" (रिफंड राशि बैंक खाते में वापस आएगी)।
    • यदि अतिरिक्त टैक्स बाकी है: आपको ऑनलाइन नेटबैंकिंग से चालान भरकर बाकी टैक्स जमा करना होगा।

✅ स्टेप 7: ई-वेरिफिकेशन (e-Verify) — सबसे अनिवार्य कदम!

फॉर्म सबमिट करने के बाद ई-वेरिफिकेशन करना 100% अनिवार्य है। ई-वेरिफाई न करने पर रिटर्न अवैध (Invalid) माना जाता है:

  1. सबसे आसान तरीका: Aadhaar OTP चुनें।
  2. आपके आधार से लिंक मोबाइल पर 6 अंकों का ओटीपी आएगा।
  3. ओटीपी दर्ज करके सबमिट करें।
  4. आपको तुरंत स्क्रीन पर ITR-V Acknowledgement रसीद मिल जाएगी।

🏦 स्टेप 8: टैक्स रिफंड का स्टेटस कैसे चेक करें?

सफलतापूर्वक ई-वेरिफाई करने के बाद आमतौर पर 15 से 30 दिनों के भीतर टैक्स रिफंड आपके बैंक खाते में क्रेडिट हो जाता है।

  • पोर्टल पर लॉगिन करें → e-File → Income Tax Returns → View Filed Returns
  • यहाँ आप अपनी फाइलिंग का स्टेटस देख सकते हैं: Successfully e-Verified → Processed → Refund Issued.

🎯

बैंक अकाउंट प्री-वैलिडेट रखें: रिफंड तभी ट्रांसफर होता है जब आपका बैंक खाता इनकम टैक्स पोर्टल पर Pre-validated हो। Profile → My Bank Accounts में जाकर अपने खाते का स्टेटस 'Validated' जरूर चेक कर लें।


❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Voice Search FAQ)

प्र: अगर कंपनी ने सारा TDS पहले ही काट लिया है, तब भी ITR भरना जरूरी है?

उत्तर: हाँ! यदि आपकी सालाना कुल आय मूल छूट सीमा (₹2.5 लाख / ₹3 लाख) से अधिक है, तो रिटर्न फाइल करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। इसके अलावा, विदेश यात्रा वीजा, बैंक से होम लोन और क्रेडिट कार्ड बनवाने के लिए 3 साल का ITR सबसे जरूरी दस्तावेज माना जाता है।

प्र: 31 जुलाई की तारीख निकलने के बाद क्या ITR भर सकते हैं?

उत्तर: हाँ, आप 31 दिसंबर तक बिलेटेड रिटर्न (Belated ITR) भर सकते हैं, लेकिन इसके लिए ₹1,000 से ₹5,000 तक की पेनल्टी देनी होगी और पिछले नुकसान को आगे कैरी-फॉरवर्ड करने का अधिकार समाप्त हो जाएगा।

प्र: क्या फाइलिंग में कोई गलती होने पर ठीक किया जा सकता है?

उत्तर: हाँ, 31 दिसंबर तक आप बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के रिवाइज्ड रिटर्न (Revised ITR u/s 139(5)) भरकर अपनी पुरानी गलतियों को सुधार सकते हैं।


🏁 अंतिम निष्कर्ष

आईटीआर फाइलिंग कोई कठिन काम नहीं है। यदि आपके पास Form 16 है, तो आज ही incometax.gov.in पर जाकर अपना रिटर्न खुद फाइल करें और अपना रुका हुआ रिफंड तुरंत अपने खाते में पाएं।

यदि आपके पास कई कंपनियों के शेयर, क्रिप्टो करेंसी या जटिल बिजनेस इनकम है, तो आप ClearTax के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की मदद ले सकते हैं।


अंतिम समीक्षा: अक्टूबर 2026। सभी नियम व धाराएं आयकर अधिनियम एवं CBDT के नवीनतम सर्कुलर्स के अनुसार सत्यापित हैं।

⚖️ Financial Disclaimer (SEBI & YMYL Compliance)

The insights, broker reviews, tax estimates, and financial data presented on RupeeNomics are strictly for educational and research purposes only. RupeeNomics and its authors are not SEBI-registered investment advisors or research analysts. Nothing published herein should be construed as personalized investment advice or a recommendation to buy or sell securities. Investments in the securities market are subject to market risks. Please conduct your own due diligence or consult a SEBI-registered financial planner before making investment decisions. Read our Editorial Policy.

About the Author

Siddharth Purohit — Founder & Chief Editor, RupeeNomics

Siddharth is an active retail investor, software engineer, and personal finance researcher based in India. He founded RupeeNomics to provide unbiased, math-grounded comparisons of Demat accounts, mutual funds, tax regimes, and insurance products. Every guide is independently researched and verified against official SEBI, AMFI, and IRDAI disclosures before publication.

📬

Enjoyed this post?

Get our weekly digest delivered free.

Share this post:

पारदर्शिता प्रकटीकरण: RupeeNomics पाठक-समर्थित मंच है। जब आप हमारे लिंक्स के माध्यम से डीमैट खाता खोलते हैं या वित्तीय सेवाएं चुनते हैं, तो हमें बिना किसी अतिरिक्त लागत के कमीशन मिल सकता है। हमारा प्रकटीकरण पढ़ें।