🌐
हिंदी संस्करण सक्रिय है — सरल व बोलचाल की भाषा में पढ़ें
टैक्स व ITR⏱ 6 मिनट का समय🇮🇳 हिंदी सक्रिय

पुरानी बनाम नई टैक्स रिजीम (FY 2026-27): किसमें होगी ज्यादा टैक्स बचत? पूरी तुलना

old tax regimenew tax regimeincome tax indiasection 80chra exemptiontax slabs indiaitr filing
पुरानी बनाम नई टैक्स रिजीम (FY 2026-27): किसमें होगी ज्यादा टैक्स बचत? पूरी तुलना

पुरानी बनाम नई टैक्स रिजीम (FY 2026-27): किसमें होगी सबसे ज्यादा टैक्स बचत?

फाइनेंस एक्ट के अनुसार अब भारत में नई टैक्स रिजीम (New Tax Regime) को व्यक्तिगत करदाताओं के लिए डिफ़ॉल्ट (Default) व्यवस्था बना दिया गया है। यानी यदि आप ITR भरते समय कोई चुनाव नहीं करते हैं, तो आपका टैक्स अपने-आप नई रिजीम के हिसाब से कटेगा।

लेकिन ध्यान रहे — "डिफ़ॉल्ट" का मतलब हमेशा "सर्वोत्तम" नहीं होता!

आपकी सालाना आय, हाउस रेंट अलाउंस (HRA), होम लोन और सेक्शन 80C कटौतियों के आधार पर, पुरानी टैक्स रिजीम आज भी कई नौकरीपेशा लोगों के ₹40,000 से लेकर ₹1.5 लाख रुपये तक बचा सकती है।

आइए वास्तविक आंकड़ों और सैलरी उदाहरणों के साथ समझें कि आपके लिए कौन सी रिजीम सबसे फायदेमंद है।


📊 टैक्स स्लैब तुलना: नई बनाम पुरानी रिजीम (FY 2026-27)

नई टैक्स रिजीम (New Tax Regime — डिफ़ॉल्ट)

कुल वार्षिक आय (Income Slab) टैक्स की दर (Tax Rate)
₹3,00,000 तक शून्य (NIL)
₹3,00,001 से ₹7,00,000 5%
₹7,00,001 से ₹10,00,000 10%
₹10,00,001 से ₹12,00,000 15%
₹12,00,001 से ₹15,00,000 20%
₹15,00,000 से अधिक 30%
  • स्टैंडर्ड डिडक्शन: नौकरीपेशा लोगों को ₹75,000 की मानक कटौती (Standard Deduction) मिलती है।
  • सेक्शन 87A छूट: यदि आपकी कुल करयोग्य आय ₹7 लाख तक है, तो पूरा टैक्स माफ हो जाता है। इसका मतलब है कि ₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलाकर ₹7.75 लाख तक की सैलरी पर ₹0 टैक्स लगता है!

पुरानी टैक्स रिजीम (Old Tax Regime)

कुल वार्षिक आय (Income Slab) टैक्स की दर (Tax Rate)
₹2,50,000 तक शून्य (NIL)
₹2,50,001 से ₹5,00,000 5%
₹5,00,001 से ₹10,00,000 20%
₹10,00,000 से अधिक 30%
  • स्टैंडर्ड डिडक्शन: ₹50,000 की मानक कटौती।
  • सेक्शन 87A छूट: ₹5 लाख तक की आय पर टैक्स शून्य।
  • मुख्य विशेषता: इसमें 70 से अधिक कटौतियां (Deductions) उपलब्ध हैं — जैसे Section 80C (₹1.5L), HRA, होम लोन ब्याज (₹2L), मेडिकल इंश्योरेंस 80D (₹75K तक), और NPS (₹50K)।

⚖️ ब्रेक-ईवन विश्लेषण (Breakeven): कब कौन सी रिजीम जीतती है?

पुरानी रिजीम तभी जीतती है जब आपकी कुल कटौतियां (Deductions) एक निश्चित सीमा को पार कर जाएं। आइए विभिन्न सैलरी स्तरों पर देखें:

1. सालाना सैलरी: ₹7.5 लाख से ₹7.75 लाख

  • नई रिजीम: ₹0 टैक्स (स्टैंडर्ड डिडक्शन + 87A रिबेट के बाद)।
  • पुरानी रिजीम: भारी निवेश दिखाने के बाद भी टैक्स नई रिजीम से कम नहीं हो सकता।
  • 🏆 विजेता: नई टैक्स रिजीम (New Regime)। बिना किसी निवेश के शून्य टैक्स!

2. सालाना सैलरी: ₹10 लाख

  • नई रिजीम में टैक्स: लगभग ₹54,600 (₹75K स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद)।
  • पुरानी रिजीम में टैक्स (बिना कटौती): लगभग ₹1,12,500।
  • पुरानी रिजीम में टैक्स (80C ₹1.5L + 80D ₹25K + NPS ₹50K = ₹2.25 लाख कटौती के बाद): लगभग ₹56,400।
  • 💡 फैसला: यदि आपकी कुल कटौतियां ₹2 लाख से कम हैं, तो नई रिजीम बेहतर है। यदि आपके पास HRA और होम लोन जोड़कर ₹2.5 लाख से अधिक कटौतियां हैं, तो पुरानी रिजीम जीत जाएगी।

3. सालाना सैलरी: ₹15 लाख

  • नई रिजीम में टैक्स: लगभग ₹1,45,600।
  • पुरानी रिजीम में टैक्स (बिना कटौती): लगभग ₹2,62,500।
  • पुरानी रिजीम (यदि आपके पास ₹4.5 लाख की कटौतियां हैं):
    • HRA छूट: ₹1.5 लाख
    • Section 80C: ₹1.5 लाख
    • Section 80D (स्वास्थ्य बीमा): ₹50,000
    • NPS 80CCD(1B): ₹50,000
    • होम लोन ब्याज (Section 24b): ₹50,000
    • कुल कटौती: ₹4.5 लाख → टैक्स बनेगा लगभग ₹1,37,500।
  • 🏆 विजेता: पुरानी रिजीम में सीधे ₹8,000 से ₹25,000 की नकद बचत होगी!

4. सालाना सैलरी: ₹20 लाख से ₹30 लाख

  • उच्च आय वर्ग में 30% टैक्स स्लैब दोनों रिजीम में लागू होता है।
  • यदि आप किराए के मकान में रहते हैं (बड़ा HRA क्लेम) या होम लोन की EMI भर रहे हैं (₹2 लाख ब्याज छूट), तो पुरानी रिजीम में ₹5 लाख से ₹7 लाख तक की कुल कटौतियां क्लेम की जा सकती हैं।
  • 🏆 विजेता: मेट्रो शहरों में रहने वाले होम लोन धारकों के लिए पुरानी रिजीम ₹50,000 से लेकर ₹1.5 लाख रुपये तक की भारी टैक्स बचत कराती है।

📝 पुरानी रिजीम में मिलने वाली मुख्य कटौतियां (Deductions List)

📬

Enjoyed this post?

Get our weekly digest delivered free.

याद रखें, ये सभी कटौतियां नई रिजीम में उपलब्ध नहीं हैं:

  1. Section 80C (अधिकतम ₹1,50,000 प्रति वर्ष):

    • EPF / PF कटौती
    • PPF (पब्लिक प्रॉविडेंट फंड)
    • ELSS टैक्स सेवर म्यूचुअल फंड (3 साल का लॉक-इन, सबसे बढ़िया रिटर्न)
    • होम लोन का मूलधन (Principal Repayment)
    • बच्चों की स्कूल ट्यूशन फीस
    • सुकन्या समृद्धि योजना (SSY)
    • जीवन बीमा प्रीमियम (LIC / Term Insurance)
  2. HRA (House Rent Allowance - मकान किराया छूट):

    • यदि आप किराए के घर में रहते हैं और रेंट स्लिप या रेंट एग्रीमेंट जमा करते हैं, तो बेसिक सैलरी और रेंट के आधार पर पूरी छूट मिलती है।
  3. Section 80D (स्वास्थ्य बीमा - Health Insurance):

    • अपने और परिवार के लिए: ₹25,000 तक
    • वरिष्ठ नागरिक माता-पिता के लिए: अतिरिक्त ₹50,000 तक
    • कुल छूट: ₹75,000 प्रति वर्ष तक।
  4. Section 80CCD(1B) — NPS अतिरिक्त छूट:

    • 80C के ₹1.5 लाख के ऊपर अलग से ₹50,000 की अतिरिक्त छूट।
  5. Section 24(b) — होम लोन ब्याज छूट:

    • स्वयं के रहने वाले घर के होम लोन पर चुकाए गए ब्याज पर ₹2,00,000 प्रति वर्ष की छूट।

🎯 आपके लिए त्वरित फैसला (Quick Decision Rules)

🎯

नई टैक्स रिजीम चुनें यदि:

  1. आपकी सालाना सैलरी ₹7.75 लाख से कम है (टैक्स बिलकुल ₹0 रहेगा)।
  2. आप किराए के घर में नहीं रहते और आपके पास कोई होम लोन नहीं है।
  3. आप PF, PPF, इंश्योरेंस आदि में पैसे लॉक नहीं करना चाहते और हाथ में ज्यादा लिक्विड कैश चाहते हैं।
  4. आपकी कुल कटौतियां ₹2.5 लाख से कम हैं।

⚠️

पुरानी टैक्स रिजीम चुनें यदि:

  1. आपकी सैलरी ₹12 लाख से अधिक है और आप किराए पर रहते हैं (HRA क्लेम करते हैं)।
  2. आप होम लोन की EMI चुका रहे हैं (सेक्शन 24b में ₹2 लाख ब्याज छूट)।
  3. आप 80C, 80D और NPS में नियमित निवेश करते हैं और कुल कटौतियां ₹3.75 लाख से अधिक हैं।


🧮 अपने खुद के नंबर कैलकुलेट करें

अपनी सैलरी, रेंट और होम लोन के हिसाब से दोनों रिजीम का सटीक टैक्स सेकंडों में कंपेयर करने के लिए हमारे फ्री टूल का उपयोग करें:

👉 पुरानी बनाम नई टैक्स रिजीम कैलकुलेटर चलाएं (FY 2026-27) →

⚖️ Financial Disclaimer (SEBI & YMYL Compliance)

The insights, broker reviews, tax estimates, and financial data presented on RupeeNomics are strictly for educational and research purposes only. RupeeNomics and its authors are not SEBI-registered investment advisors or research analysts. Nothing published herein should be construed as personalized investment advice or a recommendation to buy or sell securities. Investments in the securities market are subject to market risks. Please conduct your own due diligence or consult a SEBI-registered financial planner before making investment decisions. Read our Editorial Policy.

About the Author

Siddharth Purohit — Founder & Chief Editor, RupeeNomics

Siddharth is an active retail investor, software engineer, and personal finance researcher based in India. He founded RupeeNomics to provide unbiased, math-grounded comparisons of Demat accounts, mutual funds, tax regimes, and insurance products. Every guide is independently researched and verified against official SEBI, AMFI, and IRDAI disclosures before publication.

📬

Enjoyed this post?

Get our weekly digest delivered free.

Share this post:

पारदर्शिता प्रकटीकरण: RupeeNomics पाठक-समर्थित मंच है। जब आप हमारे लिंक्स के माध्यम से डीमैट खाता खोलते हैं या वित्तीय सेवाएं चुनते हैं, तो हमें बिना किसी अतिरिक्त लागत के कमीशन मिल सकता है। हमारा प्रकटीकरण पढ़ें।